गेरो को ही मिला है हुस्न-ए-हिजर, अहले कदम पहले,
तेरे गायत का है जिन्दा ए रिश्ता हर बेदम हम पहले।
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नूर ए अव्वल क्यु है मेरे दिल की हर एक धड़कन में,
बस है उनका रंग हर वफा से अक्ल ए रहम पहले।
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इन्यात ए वक्त घुल गया है इश्क में रंग-ए-फिरदौस,
हकीकी ए शना जिक्र सदा, हर दुआ ए रहम पहले।
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जलते ए क़रार है तेरे हुस्न-ए-गुलाब खाये कसम,
तेरा जादा ए असरा हमदुम, हर वक्त ए पयाम पहले।
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रहमत ए दो जहॉं जज्बात में वो महसूस हुई है कसक,
मिल गई थी मुझे एक आह जो हयात ए अम पहले।
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आये वो तो महफिल यतरिब ओ बतहा में रोशनी हुई,
जिंदगी में नूर, हर जिया से अफस्रान ए कराम पहले।
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आशियाना-ए-फलक का गुल ए खार उनका है जहां,
मिला जो है मुझे इक सदा से खिदमत ए बरहम पहले।
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बुत ए खाना लाये हैं लहजा मेरे अर्ज-ए-इश्क का,
गाफिल ए जाना बना कद्र है हर हाकम नशेमन पहले।
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जाने रंग-ओ-बू में किस कदर मस्ती साया ए दीवार,
अलम अरमानों नेदी है वो खता तअल्लुकातम पहले।
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दीपावली के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं कृपया मनन करें चिंतन करें और कर्म का भाव रखें -
लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु में समाहित सहज सनातन और समग्र समाज में आदरजोग सहित सप्रेम स्वरचित - आदर सहित परिचय मैं जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर में रहता हूॅं लेखन का शौक है मुझे स्वास्थ्य,सामाजिक समरसता एंव सनातन उद्घट सात्विकता से वैचारिकी प्रकट से लगाव है, नियमित रूप से लिंक्डिंन,युटूयूब,मातृभारती, अमर उजाला में मेरे अल्फाज सहित विभिन्न डिजीटल मीडिया में जुगल किशोर शर्मा के नाम से लेखन कार्य प्रकाशित होकर निशुल्क उपलब्ध है समय निकाल कर पढें ।