पग धरत धरत भुइया लोटत
फिर उठत गिरत देखत
रनिया बलखत
दशरथ गदगद
बरगद बन बन झूलत डालियां।
कलियां खिल खिल होत निहाल।
काल रुक देख करत मनुहार।
राम लीन्हो है मनुज अवतार। 1
करो साकेत पर उपकार।
नाना प्रकार सब गावत।
पावत प्रसाद ,
मन हर्षत टूटे सब बिसाद
नारी कारी कारी अंखियां लेकर
दौड़ी काजल सखियां लेकर
घायल पग नूपुर बिखरत
निखरत राम रोम रोम में।
सिहरत अंग खिलत रंग
मोह भंग , संग राम में रमे।
गावत मंगल चार।
अरे कहूं देखे चार कुमार।
आज दशरथ घर जन्म लिए
चार लला अवतार।
लिहिन सुध देव दनुज के।
आज मिटे सब शोक ,बड़े है भाग मनुज के।
भाग मनुज ने पाए ,छबीले दर्शन करके। भोले बाबा आए
वही मदारी बनके।
चंद्र दिए सब कला लाल के उज्ज्वल मुख को।
सूर्य दिए वरदान , भाग्य है सूर्य वंश को।
ठुमुक ठुमुक नाचत ललना।
चरण। छुअत लोटत अंगना।
पुलकिल मन तन फूल फूल जाए मुस्काए।
पहुना आए दशरथ
घर को।
महकाए।
धन्य भाग जो रघुवर आए।
आनंद त्रिपाठी