कन्हाई मोरे
ओ कन्हाई मोरे, बाजे जब मुरलियां तोरी,
दौड़े आए गोप गोपियां, और राधा गोरी गोरी;
कहे राधिके "कान्हा, तूं सदा थामे रहेना, बईया मोरी;
जन्मों जनमसे, युग युग से, है यह राधिका तो बस तोरी !
मोहन मोरे, काहे तरसाए जीयरा मोरा; क्यों करली तूने मोरे जियाकी चोरी ? "
Armin Dutia Motashaw