कोई मेरी स्मृतियाँ छीन रहा हैं
में कौन हूँ यें अब भूल रहा हूँ
में वैरागी हूँ या आशिक़ क्या
इस सवाल के लिए मुझे ज़िंदा रखा हैं?
यें दिल किस खोज में निकला
नहीं महबूबा मिल रहीं नहीं ईश्वर
मन के रास्ते घर तरफ चलते हैं
आँखों का रास्ता अशांत जंगल तरफ
क्या दिमाग़ कभी स्थिरता की ड़गर चूमेगा?
निक राजपूत