🦋...SuNo
औरों के घर की धूप उसे क्यूँ पसंद
हो बेची हो जिसने रौशनी अपने
मकान की,
जुल्फों के पेंचो-ख़म में उसे मत
तलाशिये,ये शायरी जुबां है किसी
बेजुबान की,
'ज़ख्मी' से बढ़कर और धनी है
कौन,उसके हृदय में पीर है सारे
जहान की...🥀🖤
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➛ ज़ख्मी 💔 दिल•••🥀
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