1 कस्तूरी
मृग कस्तूरी ढूँढ़ता, व्यर्थ हुआ बेचैन।
अंदर तन में है रखा, ढूँढ़ न पाए नैन।।
2 कबूतर
बोल कबूतर गुटरगूँ, क्या देगा संदेश।
चैट मेल अब भेजते, बदल गया परिवेश।।
3 खेत
फसलों का निर्यात कर, हुआ देश विख्यात।
खेत सभी हरिया उठे, हरे भूख दिन रात।।
4 अशोक
खड़ा विश्व के सामने, भारत हुआ अशोक।
शत्रु पड़ोसी देश भी, उन्नति सके न रोक।।
5 दृष्टि
दूर-दृष्टि का अर्थ ही, मोदी जी का नाम।
किए अनोखे कार्य हैं, दुर्लभ निपटे काम।।
मनोजकुमार शुक्ल " मनोज "
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