तू नारी है तू प्यारी है तू मांके रूपमें फुलवारी है,
तुमने झेली पीड़ा प्रसव की,तू प्यारोका प्यार है।
तू शक्ति का अवतार है,तू,जीवका सर्जनहार है,
तुजसे पलता बचपन सारा,तू जीवनका सार है।
तू त्याग है तू सदभाग्य है,तू जीवनका आधार है,
तुजमे सोयी क्षमता सारी,तू पंचजन्यका प्राण है।
तू ममता है तू समता है,तू प्यारा सा किरदार है,
प्रभु भी तेरे पांव पूजते,तू धरती का किरतार है।
तू सांस है तू विश्वाश है,तू पौरुषका अभिमान है,
आश करे नारी को वंदन,तू सब धर्मो का सार है।
...... महेश गढ़वी आश......🙏🙏🙏