जिसका जो मन करे बोलो !
सबका स्वागत है !
मै उपेक्षित, अपेक्षित
तुम्हारे हर एक शब्द के
अनुसार हूँ |
रोना -हँसना एक तरफ
सब स्वीकार करती हूँ |
स्वंय के अतिरिक्त कभी
किसी से शिकायत नही है|
हो भी क्यों सबकी जिम्मेदार
मै जो हूँ |
सबने नजरो से उतारा
तुमने ही कौन सा बड़ा काम किया |
मै जिस लायक थी तुम्हारा
व्यवहार वही रहा |
इस दुःख ,पीड़ा ,आभाव
का संबन्ध प्राणो तक ही
होगा न ? मृत्यु की गोद
तो छुड़ा ही लेगी इस दंश से |
#साथ_एक_झूठ
#कोई_किसी_का_नही