जाने क्यों ये आकांक्षा झूठी लगती है ,
जो दिख रहा है वह सब झूठ , जाने क्यों
लगता है | लगता है जैसे मेरी ही कहानी
के पात्र को उठाकर रख दिया गया हो बस,
कहानी नई बनाकर | लगता है जैसे रखने
वाले ने अपने मनोभाव ,अभिलाषा को
आकार दिया है | जाने क्यों ऐसा लगता है |
........क्रमशः