सुबह सबेरे आये थे तुम
सुबह सबेरे आये थे तुम
नया सबेरा लाये थे तुम
बहुत नहीं तो कम ही अच्छा
विविध रूप में आये थे तुम।
कितना किसको देते थे तुम
कितना किससे लेते थे तुम,
समय अपनी गति को थामे
बड़ी खुशी में लगते थे तुम।
स्नेह पुष्प बने हुये तुम
सबके साथ मिले हुये तुम,
अनवरत यहाँ चलना अच्छा
मन ही मन में लिखे हुये तुम।
हमसे आगे चले चले तुम
हर विश्वास में मिले हुये तुम,
बड़ी कथा को कहना अच्छा
जग की आशा बने हुये तुम।
सबके आगे खड़े मिले तुम
सबको आशीष दिये हुये तुम,
प्यार में जीना है अति अच्छा
सबका जीवन लिखे हुये तुम।
* महेश रौतेला