चाहे फैसले हो या सम्बन्ध ,
उन्हे आवश्यकता से अधिक खींचना
या मजबूरी मे बाँधकर रखना
उसी प्रकार व्यर्थ है जैसे एक रबर
की मुलायम बेल्ट ,
खींचने पर आप दूर होता चला जाता हैं
अंततः टूटना परिणाम |
छोड़ दो उनके जीवन के परिवर्तित
सुखद पलों में ,
जिसमे तुम्हारा रोल शूल सा प्रहार
और भयभीत करने वाला हो |
बार - बार अपनी अनुपयोगिता
के संकेतो को स्वीकार न करना ,
मूर्खता के अतिरिक्त और कुछ नही है |
#जीवन_सूत्र