चार कदम चले थे साथ-साथ
वही तो महत्वपूर्ण थे,
चार दिन रहे थे साथ-साथ
वही तो महत्वाकांक्षी थे।
क्षणभर हँसे थे साथ-साथ
वही तो पहिचान थी,
क्षणभर मुस्कराये थे साथ-साथ
वही तो दर्शन था।
पलभर बैठे थे साथ-साथ
वही तो जिज्ञासा थी,
दो दिन बोले थे साथ-साथ
वही तो मित्रता थी।
दो दिन दिखे थे साथ-साथ
वही तो प्राणवान थे,
घड़ीभर मिले थे साथ-साथ
वही तो याद थी।
एक बार हुए थे साथ-साथ
वही तो विश्वास था,
क्षणभर चल, रूके थे साथ-साथ
वही तो संतोष था।
चार कदम चले थे साथ-साथ
वही तो महत्वपूर्ण थे ।
* महेश रौतेला
२२.०६.२०१२