मंजूर है
लाख गुना फैला है तो इस ज़िंदगी में साये की तरह तेरा यु दूर से निहारना मंजूर है ,
मेरी बचपन की झूले पे तुझे देखना मंजूर है ,
यु तो रोज दीखते है हज़ारो खूबसूरत चहरे लेकिन उन मे तेरी नज़ाकत से देखना मंजूर नही है,
हो ना हो सौ मुलाकाते तेरी मेरी लेकिन तुझे दूर से ही चाहना मंजूर है हमे........
Piyu