मै तुम्हे पा लूँ
मेरी इतनी औकात कहाँ।
उड़कर आसमाँ को छू लूँ
मेरी इतनी औकात कहाँ। ।
ऐ काश मुझे तेरी बांहो का सहारा मिल जाए।
मेरी इतनी औकात कहाँ। ।
मै सारी उमर यूँ ही चलती रहूँ धूप मे तेरे पिछे -पिछे।
कही जल न जाए मेरे पाँव धूप मे
तुझे ये इल्म हो मेरी इतनी औकात कहाँ। ।
मीरा सिंह
-Meera Singh