अधूरा सपना
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नव जीवन की खूबसूरत हसरतें
वीरानियो में खो गईं,
सारे अरमान खाक हो गये,
जीवन का उद्देश्य खत्म हो गया।
क्योंकि सपनों का सूत्रधार ही
सारे सपने नोच रहा था
हर सपने पर खौफ की
नई इबारत लिख रहा था।
अब तो पूरे या अधूरे सपनों की बात
सोचने से पहले जीवन बचाने की
जद्दोजहद करना है,
जीवन मृत्यु के बीच लटके जीवन से
जंग करना है।
सपनों की बात सिर्फ सपना है
क्योंकि अब दिखता न कोई अपना है
जो अपना कहलाता है
वास्तव में उसी से तो बचना है
अपने अस्तित्व की खातिर
जान की फ्रिक किए बिना
अंतिम प्रयास जो करना है
जीवन बच जाए तो
अधूरा सपना जैसे
पूरा का पूरा सपना सिर्फ अपना है
वरना हर सपना मात्र सपना था
जब अधूरा सपना भी बिखर जाना है,
क्या अधूरा क्या पूरा सपना
महज सपना रह जाना है।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उत्तर प्रदेश
८११५२८५९२१
© मौलिक स्वरचित
०६.०४.२०२२