भगवान श्री सूर्य देव साक्षात दर्शन देने वाले भगवान आपको ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है आज रविवार इतवार संडे है...आओ स्तुति करें भगवान श्री सूर्य देव जी की -ब्रह्मदत्त
श्रीसूर्यस्य प्रातःस्मरणम्
प्रातः सरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं स्पं हि मण्डलमत्रोऽथ तनुर्यजूंपि ।सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम् ॥१॥-ब्रह्मदत्त त्यागी
कल आने वाले दिन सोमवार के लिए भगवान शिव महादेव महाकाल को बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार ब्रह्मदत्त
ॐ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वर्धनम उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्-ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
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भगवान श्री सूर्य देव साक्षात दर्शन देने वाले भगवान आपको ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ एवं सभी भक्तों का बारंबार प्रणाम नमन नमस्कार है आज रविवार इतवार संडे है...आओ स्तुति करें भगवान श्री सूर्य देव जी की -ब्रह्मदत्त
श्रीसूर्यस्य प्रातःस्मरणम्
प्रातः सरामि खलु तत्सवितुर्वरेण्यं
स्पं हि मण्डलमत्रोऽथ तनुर्यजूंपि ।
सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं
ब्रह्माहरात्मकमलक्ष्यमचिन्त्यरूपम् ॥१॥
प्रातर्नमामि तरणिं तनुवाङ्मनोभि-ब्रह्मेन्द्रपूर्वकसुरैर्नतमर्चितं
वृष्टिप्रमोचनविनिग्रहहेतुभूतं त्रैलोक्यपालनपरं त्रिगुणात्मकं च ॥२॥
प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्ति पापौघशत्रुभयरोगहरं परं च।
तं सर्वलोककलनात्मककालमूर्ति गोकण्ठबन्धनविमोचनमादिदेवम् ॥३॥
श्लोकत्रयमिदं भानोः प्रातःकाले पठेत्तु यः ।
सर्वव्याधिनिर्मुक्तः परं
सुसमवाप्नुयात् ॥ ४॥
मैं उन सूर्य भगवान् के श्रेष्ठ रूप का प्रातःसमय स्मरण करता हूँ, जिनका मण्डल
ऋग्वेद, तनु यजुर्वेद और किरणे सामवेद हैं तथा जो ब्रह्मा और शङ्कर के रूप हैं । जो जगत्
की उत्पत्ति, रक्षा और नागके कारण हैं, अलथ्य और अचिन्त्यस्वरूप हैं ॥१॥ मैं प्रातः-
काल शरीर, वाणी और मनके द्वाग ब्रह्मा, इन्द्र आदि देवताओसे स्तुत और पूजिन, वृष्टिग.
कारण एवं वृष्टिके हेतु, तीनो लोकोके पालनमे तत्पर और सत्त्व आदि त्रिगुणरूप धारण करनेवाले
तरणि ( सूर्यभगवान् ) को नमस्कार करता हूँ ॥ २ ॥ जो पापोके समूह तथा शत्रुजनित भय
एवं रोगों का नाश करने वाले हैं, सबसे उत्कृष्ट हैं, सम्पूर्ण लोकों के समय की गणनाके निमित्तभूत
कालस्वरूप हैं और गौओके कण्ठबन्धन छुड़ानेवाले हैं, उन अनन्तशक्तिसम्पन्न आदिदेव सविता (सूर्यभगवान् ) को मैं प्रातःकाल भजता हूँ ॥ ३ ॥ जो मनुष्य प्रातःकाल सूर्यके
स्मरण रूप इन तीनो श्लोकों का पाठ करेगा, वह सब रोगों से मुक्त होकर परम सुख प्राप्त
कर लेगा ॥४॥
प्रस्तुतकर्ता-ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़