एक दिन जब बिना वजह कहेंगे अलविदा इस महफिल को,
तब पता नहीं किसके कितने अश्रु बहेंगे,
और जिनको कभी कोई समझ न पाया,
उनके परिवार को लोग इस कड़वी हकीकत की फिलसूफी सुनाएंगे,
करते रहे जिनकी बदनामी जिंदगी भर,
वह मरणोपरांत मसरूफ हो कैसे गए?
यूं तो उनका मशहूर होना लाजमी था,
कोई जी गया था बड़े पैमाने पर जिंदगी!
-Maitri Barbhaiya