शिर्षक: रुसवाइयों का शहर
मायूस हुई मोहब्बत को, एक अदद नजर चाहिए
मधुशाला में, प्यासे को प्यार से, एक जाम चाहिए
शाकी, मुहँ न फेर, दीवाने की भी कोई चाहत होती
देख जज्बे को, बेकसूर आरजू, योहिं तो नहीं आती
कल तक के वो हमसफ़र, अब अजनबी कहलाते
तौहीन हो प्यार की, आजकल इसे मोहब्बत कहते
शतरंज बन जब जिंदगी, प्यार के दस्तूर भूल जाती
वफ़ा की दुहाई देकर, नई दास्तां लिखने बैठ जाती
कल थे, कसीदे प्यार के, आज तराने बेवफाई के
यार की गली में, अब आशियाँ नहीं रहे, प्यार के
आखिर, तन्हां दिल, कहाँ तक का सफर करेगा ?
रुसवाईयाँ के शहर में, क्या दीवाना अकेला रहेगा ?
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali