अरमान तो कहीं सारे है,
मगर लड़की हूँ ना,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें ?
ना बचपन में खिलौने मिले,
ना गलियों वाले खेल,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
ना पापा का प्यार मिला,
ना दादी का दुलार,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
ना भाई जैसे कपड़े मिले,
ना भाई जैसा खाना,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
ना पढाई लिखाई मिले,
ना सहेलियों का साथ,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
ना किसी ने मेरी मर्जी जानी,
ना किसी ने मेरी ख्वाईश,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
समय आने पर सादी करवा दी,
भेज दिया पराये घर,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
ना पति से सन्मान मिला,
ना परिवार में प्यार मिला,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
बच्चों के साथ जिंदगी बिता दी,
देखते हीं देखते उम्र गुज़ार दी,
कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?
अरमान तो पूरे हुए नहीं,
लेकिन जिंदगी पूरी होने को आईं,
अब कैसे पूरे होंगे अपने सपनें?