शीर्षक : नव- जीवन सिद्धान्त
प्रवीर होती है, जिंदगी कुछ अनहोनी के बाद
कीमती हो जाती है, यादे, वक्त गुजरने के बाद
जिंदगी वक्त का, एक खिलौना बन कर रह गई
जिसकी साँसों की चाभी, लगता उल्टी घूम गई
बंद दरवाजों का खुलना, अब इतफाक लगता
राहें इंतजार को, अब आहटों से भी ख़ौफ़ लगता
मुक्त हो वासनाओं से, जिंदगी का नया रूप धरों
मानस के संत बन, हर कर्म प्रभु के रुप-स्वरूप करो
हर डर को अलविदा कर, संयम पर अधिकार करो
मृत्यु को दो संदेश, समय से पहले उसे अस्वीकार करो
नादां न बनो, मन मृगया कर, जीवन सफर तय न करो
नजाकत वक्त की समझो, पाये हुए दुःख, न याद करो
भक्ति, सेवा से तन-मन परिष्कार कर, चित शांत करो
इस जीवन सिद्धांत का, आत्मिक हो, अब शृंगार करो
✍️ कमल भंसाली