कभी इशारे से तो कभी नाम ले कर बुलाती है जिंदगी।
मुश्किलों से लड़ना तो कभी हौसले दे जाती है जिंदगी।
उम्र गुजर जाती है इंसान की जिंदगी का पाठ पढ़ते पढ़ते।फिर एक दिन हमेशा के लिए ख़ामोश कर जाती है जिंदगी।
क्या है जो हम खुद से आज़ाद नहीं कर पाते हैं जीते जी।
लड़ाई-झगड़े ,ईर्ष्या-द्वेश और जाने क्या दे जाती है जिंदगी
जब से चलना सीखा है लोगो को देखा है मतलबी होते।
कभी मेरे मक़तब तो कभी मेरे गुरुकुल में आती है जिंदगी
जाने क्यों लोग इल्ज़ाम लगा कर मुझ पर खुश होते हैं।
मुझे रोते देख कर भी कभी कभी मुस्कुरा देती है जिंदगी।
अनपढ़ भले हो "अर्जुन " मगर सब सिखा देती है जिंदगी
तुम "अछूत " हो तो क्या मगर गले लगा लेती है जिंदगी।
-Arjun Allahabadi