लगे दाग दिल के छुपा ना સકે,
उन्हें हाल अपना बता ना सके।
शराफत ने हमको रोक रक्खा,
जगी चाह दिलकी दबा ना सके।
कभीतो उन्हें होश आयेगा माना,
मगर इस जख्म से बचा ना सके।
रहे हम सदा युंही कीस्मत के मारे,
मुकदर को जोअपने बना ना सके
बड़ा ये सीतम है जो तुने कीया है
अकेले सफर हम निभा ना सके,।
रहा है वो जो नाम अपनी जबां पे,
बहोत चाह कर भी भुला ना सके।
सहीगयेजीस्तकीतल्खीयां मासूम,
बढ़ी बे करारी हम मीटा ना सके।
मासूम मोडासवी