पसीना जो गरमी से आता है
और पसीना जो श्रम से निकलता है,
दोनों में अन्तर ईश्वर करता है।
प्यार जो धोखे से होता है
प्यार जो मन से होता है,
दोनों में अन्तर ईश्वर करता है।
सांसें जो हम ले चुके हैं
सांसें जो शेष लेनी हैं,
दोनों में अन्तर ईश्वर करता है।
संवेदनायें जो मर चुकी हैं
संवेदनायें जो जीवित हैं,
दोनों का हिसाब ईश्वर रखता है।
* महेश रौतेला