इक नई सहर सुहानी मिल गई,
देखिए कली ,रुहानी खिल गई ।
इतरा कर हल्का सा धक्का दिया,
दिल्लगी याराना ,हिलमिल गई।
बड़ी मुश्किल थी ,मिलना दूआए,
अहदे वफ़ा में , तसल्ली मिल गई।
है गज़ब की इबादत रूहानी दिल,
कुर्बानी ऐसी , होंठों को सिल गई।
मनकी अटारिया ,खुली तिलस्मी,
आनंद में ही ,देखिए घूलमिल गई।
-મોહનભાઈ આનંદ