रिश्तोकी एहमियत रखते समझते हैं जहां लोग , वहां मेरा रूक ना ठीक नहीं, में तो बस प्रेम को मानता पुजता हुं ,फीर मुसाफ़िर मेरा यहां काम नहीं।।
मुसाफ़िर हूं यारों, ना घर है ना ठीकाना मुझे चलते जाना है, बस चलते जाना...
-Hemant Pandya રાજે જીંદગી તુજે તો સુલજાલું