पुरुष का दुःख, दुःख नहीं! उसे रोने का अधिकार नहीं! भावों से भरा पर भाव प्रकट करे तो वो मर्द नहीं, पुरुष यदि मानसिक रूप से परेशान हैं तो समाज उसको कमजोर बोलता है और, "तुम मर्द हो! मर्द ऐसा नहीं करते", बोल कर छोड़ देता है कोई साथ नहीं होता, वह अकेला था और सदैव रहता भी है...!!!