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मैने उसे वहाँ देखा था
जहाँ दृष्टि की अन्तिम थकान उतरती है
मुझे नहीं पता था
कि वहीं वह सागर है जहाँ मुझे डूबना है
अब भी नहीं पता
क्योंकि अब पता करने को कुछ रह नहीं गया
मुझमें एक घुमाव है
जिसकी यात्रा सीधी और अपरापर है
मुझे उसी एक में सधना है
कि जो सत्य है उसे उघड़ना ही है;
ज्यों उघड़ती है धूप निस्सीम आकाश में
मुझको मुझमें ही रहते जाना है