मैंने तुम्हें पुकारा था...
जब भी मुझे डर लगता था...
जब भी मुझे लगता था...
की इस दुनिया में मेरा कोई नही...
तब तब मैंने आवाज दी...
इस जहाँन की हर दिशाओं में...
हर उस जगह पुकारा..
जहाँ से मिलनें की तुम्हारी आस थी..
मैंने तुम्हें पुकारा था..
क्या तुम्हें वो आवाज सुनाई दी..