मेरे देश की हवा यहाँ पर ठंडी होती है,
नभ में निकला नक्षत्र यहाँ पर पूजा जाता है,
नदी तटों पर तीर्थ यहाँ पर गाये जाते हैं,
सुख-दुख की बातें बता-बता कर रात बीताते हैं,
स्नेह- प्यार के किस्से कहकर गीत सुनाते हैं ,
मेरे देश का झंडा यहाँ पर फहरा करता है ।
**महेश रौतेला