कोरोना’ की राहों में चलना सँभल के....
‘कोरोना’ की राहों में चलना सँभल के
यहाँ जो भी आया गया हाथ मल के
न पायी किसी ने चैन की ज़िंदगीं
क़दम डगमगाये जरा दुर चल के
हमें ढुंढनी है ‘कोरोना’ की रसी
कहाँ आ गये हम ढुंढते ढुंढते
कहीं टूट जाये न उम्मीद भरा दिल
न यूँ रोग फेलाओ नाम बदल के
‘कोरोना’ की राहों में चलना सँभल के ।