#माफी
कर दो माफ़
माँग लो माफ़ी सबसे
जीवन छोटा सा,नन्हा सा
है जाने कितने दिन?
छोटी-छोटी बातों में
उलझना है बेकार
मग़र माफ़ करना न हैवानों को
ये होंगे नहीं कभी शर्मसार
लजाते हैं माँ की कोख
चढ़ाना होगा इन्हें सरेआम
फाँसी पर
आख़िर कब तक
बंद करे बैठे रहोगे
आँख-कान?
इंसाफ़ तुम्हे ही होगा करना
अपनी माँ-बहनों की
अस्मिता का
जगाना होगा अपने भीतर
एक संवाद
उठानी होगी मशाल
ख़त्म करने को
इस प्रजाति को
जो बीहड़ बन सी
उगा रही है
पाशविक जंगल
अपने भीतर!!
डाॅ.प्रणव भारती