क्या दृश्य क्या समां था
ऊपर नीला आसमां था
नीचे हरी भरी धरा और
बह रहा एक झरना था
दृश्य बड़ा नैसर्गिक था
पेड़ की ओट में छिप कर
देख रहा मेरा आशिक़ था
मेरे दिल में उमंगें फूट पड़ी थीं
अरमानों की तरंगें बह रही थीं
कि शायद कहीं वो पास आता
एक बार गले से मुझे लगाता .