दहेज़ एक प्रथा नहीं है, यह भीख !
लेने का एक सामाजिक़ तरीक़ा है!
फर्क़ बस इतना हैं देने वाले की गर्दन !
झुकी है, और लेने वालें की अकड़ बढ़ी है!
मुझे पता है ये कड़वा सच है इसलिए!
❣️..ही इसे शेयर कर रहा हूँ !
रिश्ते दिल से जुड़ते हैं पैसों से नहीं..❣️
अमृत....