अगर खुशियां उत्सवो मे मिलती हे
तो लोग हररोज उत्सव मनाते ही मिलते ,
सादगी से पाने वाली खुशियां शुकुन भी दे जाती हे
फिर धीरे धीरे हमारे स्वभाव को प्रसन्न रहने की
आदत पड जाती हे
और फिर आदत नशे मे ताबदिल होकर लत बन जाती हे
स्वभाव का दुसरा नाम ही प्रसन्नता पड जाता हे