#Zen
जो अँधेरे में खड़ा है और भीतर लड़ रहा है
बाहर और भीतर जिसे हर क्षण अँधेरा खींचता है
ध्यान और बस मौन से ही पार कर लेगा समय को
'ज़ेन' ही वह आस्था है ,जो जिताएगी सभी को !
कर्म और सतकर्म के खाँचे बने हैं सबके मन में
रुँध रहे हैं गीत सारे ,सत्य और झूठे बहम में
मन हरेक क्षण भीगता है ,कंट सा भीतर चुभा है
जो रहे चैतन्य ,वो ही पार कर लेगा समय को
आस और विश्वास के दीपक जलाने मन के द्वारे
साधना की कामना उल्ल्सित होकर पग पखारे
'ज़ेन' में है साधना भी ,है यही चिंतन की गगरी
कौन है जो इस सदी में ख़ुद से ख़ुद ही न डरा है ??
डॉ. प्रणव भारती