ये कविता एक प्रश्न है उस मानसिक मंथन के बारे जो गलत कदम उठाने को मजबूर कर देती है ।
ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत को समर्पित।।।
कैसे ???
यूं कैसे कोई मुस्कुराना भूल जाता है
अपने होने का बहाना भूल जाता है
अपनी ही बनाई मुश्किलों में यूं उलझता है
कि साँसों के धागो को सुलझाना भूल जाता है
एक गलत कदम भी पहचान लेते थे
वो अपने कहाँ है जो दिल की बात जान लेते थे
वो कन्धा जिस पर सर रख हम अपनी गलती मान लेते थे
वो दोस्त जिसका हम अनगिनत एहसान लेते थे
यूं कैसे कोई मुस्कुराना भूल जाता है
अपने होने का बहाना भूल जाता है
क्यों अक्सर साया भी तनहा छोड़ जाता है
रोते है पर आसूं भी नज़र नहीं आता है
दिल में एक अंजाना तूफां सा उठता है
और इंसान न चाह कर भी उसमें डूब जाता है
यूं कैसे कोई मुस्कुराना भूल जाता है
अपने होने का बहाना भूल जाता है।।
---रंगोली