मेरे मन में हररोज एक तुफान सा उठता है,
पर वो ऐसे ही वहा पर केद रहेता है।
शायद किसी के ना समझने के डर से उलझन में फंसाया है।
किसी को भी नहीं समझाना मुझे,
पर तु ही है जो सब जानता है।
एक तु ही है जो मुझे अपना मानता है।
"रिवोल्यूशन २०२०" की बात भुल गया तु शायद,
ऐसे केसे स्वप्न तोड़ सकता है।
अभी तो बहार खिल रही थी,
फिर से पतझड़ कैसे कर देता है।
शायद बहुत शिकायत करती हूं मैं,
पर एक तु ही तो है जो मेरे मन को जानता है।
एक तु ही है जो मुझे अपना मानता है।
_Apeksha Diyora😊