मुझे अब सुख और दुःख में फ़र्क समझ नहीं आता।
मुझे ख़ुशी महसूस ही नहीं होती,
बस आँखे वज़ह-बेवज़ह छलक जाती हैं..
केवल आँसू वज़ह ढूंढते हैं,, जैसे उन्हें तलब लगी थी बह जाने की।
जैसे वो भी मुझे तुम्हारी ही तरह छोड़ देना चाहते हैं।।
कभी-कभी तो मुझे पता ही नहीं होता आँखों में आँसू हैं,
फिर जब पलकें झपकती हैं तब मालूम पड़ता है आँखें लबालब भरी हुई थीं।
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