देर सवेरे मैं उठा
देर सवेरे मैं उठा ,
कुछ पीछे तो कुछ आगे बढ़ा ,
कही गिर तो कही उठा ,
देर सवेरे मैं उठा ,
न मैं घबराया न मैं डर,
देर सवेरे मैं उठा,
कुछ सोच तो कुछ किया,
बिना रुके मैं चला,
देर सवेरे मैं उठा ,
चोट लगी कही तो कही गिर ,
देर सवेरे मैं उठा,
कुछ टुटा तो कुछ जुड़,
देर सवेरे मैं उठा,
कुछ हार तो कुछ जीत,
देर सवेरे मैं उठा,
कुछ भाग तो कुछ डटा,
देर सवेरे मैं उठा,
कही दोस्त, कही अपने
कुछ आँखे, कुछ आशु ,
संग लिए मैं चल।
देर सवेरे मैं उठा
कुछ पीछे तो कुछ आगे बढ़ा….
देर सवेरे मैं उठा…
By
TRISHALA