छोड़ छाड़ के गए थे वो रक्षा करने देश की,
वापस कभी ना आए वो जान आपनी देदी।।
समझो यारो, समय नहीं है क्या होता है देश ये,
जान देने वाले सब वीर इंसान नहीं वो शेर थे।।
भाई-बहन, मा-बाप सब कुछ उसके पास था,
लड़ने गए फिरभी यारो, वतन उसकी जान था।।
कुछतो समझो दोस्त मेरे अब समय है तुम्हे बुला रहा,
छोड़ो परदेशी अपनाओ स्वदेशी समय अब कह रहा।।
श्रद्धांजलि सही देदो यारो, रूह उसकी खुश होगी,
गोली खंजर बात नहीं, बहिष्कार ही चाबी होगी।।