घर -------
घर बहुत पुराना था ये ---लंबा -चौड़ा -----बहुत से कमरों वाला
कमरों के नाम भी थे बड़े सुन्दर ,बड़े प्यारे प्रेम,स्नेह,लाड़ ,दुलार मुस्कान ,
खिलखिलाहट मेजबानी ,कुर्बानी हाँ,इनसे दूरी पर कुछ और भी कमरे थे
जिनमें शायद ही कोई झाँकता था उनके भी नाम ---लिप्सा,माया तृष्णा ,घृणा,ईर्ष्या
उनमें जाने पर झुलस जाने का भय पालती मारे बैठा रहता ---सो ताले लगा दिए गए थे उनमें ---
किन्तु चुराने के लिए घुस ही तो आए कुछ लोग देखकर मोटे ताले
बीज उगा लालच का --तोड़ लिया गया मोटे तालों को
अब कमरों की क़तार में न जाने कैसे ---दूर वाले कमरे उड़कर चिपक गए आगे
पुराने मकान के आँगन में घर का थरथराता बूढा मालिक सोच में था क्या कमरों के भी पँख होते हैं ?
कमरों में पसरती दुर्गंध से आकुल-व्याकुल हो उसने छोड़ दिया अपना वो --पुराना घर
अगले दिन सुबह सड़क पर लैंप-पोस्ट के नीचे उसकी झिंगली खाट पड़ी थी ---||