प्यार की दुनिया में है बड़ी दशहत, जान न पाया है उसकी असलियत।
ओझल होती है उसमें सख्सियत, जान ले होगी ही जग में फजीहत।
जान ले अपने मन की हैसियत, साफ़ दिखाते लोग हैवानियत।
प्यार में हो सिर्फ रूहानियत, मन में हो केवल मासूमियत।
प्यार की है जिंदगी में अहमियत, प्यार में साफ हो सबकी नियत।
प्यार का मामला है सोच, समझ कर चलो, ले लो सबकी नसीहत।
हो न किसी का दिल आहत, परहित की हो मन से इनायत।
ख्याल में रहे सदा ही खैरियत, भूलो मत मन अपनी इंसानियत।
पार कर प्यार हो मुकम्मल, शरीयत, तरीकत, मारफत, हकीकत।
लिख दूँ जिंदगी तेरे नाम वसीयत, हो अगर यह रब की इजाज़त।
-दीपेश कामडी 'अनीस'