# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .मूर्ख "
# कविता ***
मूर्ख बुद्धिहीन ,ही होता है ।
वह भोला और मासूम ,दिल का सीधा होता है ।।
पर वह हर पल ,मूर्खतापूर्ण कार्य करता है ।
उसकी हरकतें देख कर ,लोग हंसते है ।।
मूर्ख कभी बुद्धिशाली ,बात नहीं करता है ।
मूर्ख जिस डाली पर बैठता है ,उसे ही काटता है ।।
संयोगिता ने मूर्ख कालिदास को ,अपनी चातुर्य से कवि बनाया था ।
कोई अच्छा गुरु ही ,मूर्ख को सुधार सकता है ।।
मूर्ख का उपहास न करें ,उसे माफ करें ।
मूर्ख सभी लोगो को ,अपने समान ही मानता है ।।
मूर्ख किसी को ,परेशां नहीं करता है ।
कहता बृजेश मूर्ख से सहानुभूति रखें ,उसका उपहास न उडायें ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।