Hindi Quote in Story by Pawan Prajapati

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लघु कथा : यत्र नार्यस्तु पूज्यंते

पुरुषोत्तमलाल शहर के जाने माने वकील और नेता तो थे ही साथ ही एक बेहतरीन वक्ता भी थे। आज महिला दिवस की संध्या पर पर शहर में आयोजित एक सभा को सम्बोधित कर रहे थे।

''भाईयों और बहिनों! हम उस संस्कृति का हिस्सा है जहां नारी की पूजा की जाती है। 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवता:' अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं। इतिहास साक्षी है कि यहां नारी का अपमान करने वाले लंकेशों, दुर्योधनों व दुशासनों को अपने कुल सहित विनाश को प्राप्त होना पड़ा है। नारी शक्ति का केन्द्र है। हमें ऐसी गौरवशाली संस्कृति का हिस्सा होने पर गर्व है जिसने नारी को इतना सम्मान दिया है। आज कदाचित विश्व की किसी भी संस्कृति में नारी को वो सम्मान प्राप्त नहीं है जो हमारी संस्कृति में प्राप्त है।''

पुरुषोत्तमलाल धारा प्रवाह भाषण दे रहे थे, श्रोता भी मुग्ध होकर सुन रहे थे।

इतने में पुरुषोत्तमलाल का फोन बज उठता है और वो अपना उद्बोधन जल्दी समाप्त कर निकल जाते हैं।

पुरुषोतमलाल की पत्नी ने तीसरे बच्चे के रूप में कन्या को जन्म दिया था। दो बेटियां पहले से थी। जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ थे फिर भी पुरुषोत्तमलाल के चेहरे पर एक अजीब मायूसी थी। थोड़ी देर पहले नारी सम्मान पर बड़ी बड़ी बातें करने वाले पुरुषोत्तमदास उसी नारी के अपने घर आगमन पर प्रसन्न दिखाई नहीं दे रहे थे। कदाचित उन्हें इस बार बेटे की आशा थी। वे दिल पर बोझ लिये घर पहुॅंचे।

उस रात के अन्धेरे ने एक बार फिर शहर के मुँह पर कालिख पोत दी थी और 'यत्र नार्यस्तु पूज्यंते..' वाला वेद वाक्य सुबह होते होते शहर की किसी नाली में दम तोड़ गया।

अखबार के किसी छोटे से कोने में शहर में नवजात बच्ची का शव मिलने की खबर छपी थी।

Hindi Story by Pawan Prajapati : 111470925
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