आजकल नींद नहीं आती देखो तो ज़रा,
सहर होने में अभी कितनी रात बाक़ी है?
थक गए हरपल यूं मर-मर कर जीते,
पता करो कि अभी कितनी सांस बाकी है?
बनकर रह गए मोहरा जीवन की शतरंज में,
न जाने अपनों की अभी कितनी चाल बाकी हैं?
बनते-बिगड़ते ,बदरंग हुए मेरे सपनों के,
पूरे होने की अभी कितनी आस बाकी है?
अधूरी ख्वाहिशों की फेहरिस्त लंबी है ज़रा,
टेक आएंगें माथा क्या और भी ईश्वर बाकी हैं ?
छलनी हो गए दिल-ओ-जिगर ,जां सब,
दिल में बसने वालों के अभी कितने सितम बाकी हैं?
दिल को मेरे पिघला देता है हर बार रोकर वो
पता करो आँखों में अभी कितना पानी बाकी है?
कोई करता है हरपल मेरे जीने की दुआ,
क्या पता उनका अभी कितना असर बाकी है?