बची जिन्दगी की धड़कने कुछ शेष हैं , माजरा पूछा तो बोला मेरा देश सर्वश्रेष्ठ है|
नीलामियों मे खो गई हसरते सारी , दिल टूटकर छिटका तो तो संभला यहाँ आकर |
प्रेम मिटा नही बल्कि तासीर बढ़ा दी जब से इसमे देश की थोड़ी मिट्टी मिला दी|
जानती हूँ कि आकार नही , इस मिट्टी से मूर्ती बना सकूँ मैं, ऐसी भी कलाकार नही | पर इसकी खुशबू से मन मेरा बहकता है|
झूमने लगती हूँ मैं, पक्षियो सा मन चहकता है, देश के बाहर जब मेरे देश का नाम सजता है |