शांति की तलाश में
भटका भागा मैं जगह जगह
जब तलक ना मिलेगी शांति
सोचा कि बस यूं ही
चलता रहूं कहीं भी रुकूं न
पर कहीं भी नहीं मिला सुकून
ठहरा फ़िर मैं कि शायद यूं
मिल जाए शांति मुझे
पर ना मिला कुछ सुकून
थम कर रोक कर पग
जब झांका भीतर अपने
तो मिली बड़ी उथल पुथल
दौड़ रहा था, भटक रहा था
ये मन अंधाधुंध यहां वहां
नहीं था शांत कुछ भी भीतर
:- भुवन पांडे
#शांत