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Nilesh Rajput

Nilesh Rajput Matrubharti Verified

@nileshrajput842gmail.com162713
(1.2m)

खड़े हो यूँ हाथों में गुलदस्ता लिए तुम,
अभी तो रगों में ज़हर उतरना बाकी है,
जलकर ख़ाक होना है अभी, ठहर जाओ तुम,
अभी तो उनका दुल्हन बनते देखना बाकी है।

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शिकायत भी किस बात की करें,
वह किसी और के लिए सही वफ़ादार तो है।

जय हिंद

युद्ध शुरू होते ही पहले,
मानवता को मार दिया जाता है।
वर्दी पहना सैनिक
दौड़ता है सामने खड़े
दूसरी वर्दी पहने सैनिक की ओर,
और उसी पल
माँओं की गोद सूनी होने लगती है।
गोलियों की चीख से
रणभूमि में
धीरे-धीरे कब्रों की कतार लग जाती है।
बंदूक से निकली गोली
किसी सैनिक के भीतर उतरने से पहले
उसके परिवार की तस्वीरों को
चीरती हुई गुजरती है।
वर्दी पहने
दोनों तरफ़ के सैनिक
अपने-अपने सपनों को जिंदा जलाकर
एक-दूसरे का सीना छलनी कर देते हैं।
फिर होती है कब्रों की गिनती,
और अंत में
उसी कब्र पर झंडा लहरा दिया जाता है।
खून से भीगी इस मिट्टी की कलम से
काग़ज़ों पर
नक़्शे बदल दिए जाते हैं।
दोनों तरफ़ की सरहदों पर
सैकड़ों लाशें बिछी होती हैं,
लेकिन सरहद के पार
सिर्फ़ जीत का जश्न मनाया जाता है।
जमीं के इस टुकड़े की लड़ाई में
लाशों की गिनती होती है,
जीत के नारे लगते हैं—
पर कोई नहीं पूछता,
क्या ये युद्ध रोका जा सकता था?

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તું બનીશ જો ચોક,
તો મને ઘુંટાવુંય ગમે…
પણ બનીશ જો પેન,
તો તારું ચેકાવું મને નહિ ગમે.

એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી

સવારના સૂરજ સાથે મારું ગામ જાગતું જાય,
જ્યાં ધૂળિયા રસ્તે ચાલતા લોકો જય શ્રી રામ કહેતા જાય,
એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી,

જ્યાં ધરતી–ખેડૂત એક થતાં માટીની સુગંધ ચારેકોર ફેલાય,
જ્યાં આકાશ, વાદળ, ધરતી શું? પાકને દેવતા માની પૂજાય,
જ્યાં નાત–જાતના ભેદ ભૂલી, દરેક તહેવાર ધૂમધામથી ઉજવાય,
જ્યાં સંસ્કૃતિ, સંસ્કાર અને સંગાથનું મિલન અનોખું થાય,
એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી,

જ્યાં ઓટલાં–ફળીયાંમાં લંગડી, ખો-ખો રમતા હૈયું ખીલી જાય,
જ્યાં એક પોકારે વાડા–ફળીયાંથી ગામના મિત્રો ભેગા થાય,
જ્યાં કાચી કેરીના સ્વાદ માટે ટોળું એકઠું થાય,
જ્યાં સાંજે ઘંટડીના નાદ સાથે હનુમાન ચાલીસા ગુંજાય,
એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી,

જ્યાં બાળપણ યાદ આવતા મારી આંખો ભીની થાય,
જેનું નામ લેતા મારી ડોક ગર્વથી ઊંચી થાય,
એ મારું વ્હાલું ગામડું કંસારી..

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અજાણ્યો પત્ર - 26

रात के ठीक 12 बजे की वो घड़ी थी, जब मेरे सीने से बस एक ही आवाज़ बार-बार गूंज रही थी। दीवार पर टंगा आईना खामोशी से मुझ पर ताक रहा था और कमरा किसी श्मशान घाट में बदल चुका था। बाहर बारिश मेरे आँसुओं से मिलने को तरस रही थी और आख़िरकार मेरी धड़कन उसी पल रुक गई, जब उसने आख़िरी बार मेरा नाम लेकर कहा की“मुझे तुमसे मोहब्बत नहीं है, मैं किसी और से प्यार करती हूँ और तुम जानते हो वो कौन है…” बस उसी वक्त मैंने फोन रख दिया....फोन को खुद से दूर किया...पर उनकी आवाज़ अब भी मेरे कानों में गूंज रही थी! मैं निशब्द हो गया... भीतर जो शोर था वो शांत हो गया...धड़कन अब रुकने को बेताब थी और अंत में मैंने धड़कन की सुन ही ली।

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मैं तुम्हारे साथ comfortable हूँ,
पर मैं तुमसे प्यार नहीं करती।

दिन के अंत में
अपनी हर अच्छी–बुरी बात
तुम्हें बता देती हूँ,
मगर मैं तुमसे प्यार नहीं करती।
तुम्हारे साथ चलना,
मुस्कुराना, रोना, रूठना—
सब अच्छा लगता है,
मगर मैं तुमसे प्यार नहीं करती।
मैं तुम्हे पूरी जिंदगी
साथ रखना चाहती हूं,
मगर मैं तुमसे प्यार नहीं करती।
मैं तुम्हें गले लगाकर
रोना चाहती हूं, अभी इसी वक्त,
पर मैं तुमसे प्यार नहीं करती!

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मुझे हर किसी ने reject किया—

बालकनी में खड़ी परी-सी कोई लड़की हो,
या दूरी ओढ़े किसी शहर में बसी कोई लड़की,

चार साल का पुराना प्यार हो,
या पहला-पहला इश्क़,

हाथों से बंधे धागे हों,
या उन्हीं हाथों की किस्मत की लकीरें,

कहीं ऑफिस में बैठा HR हो,
या अपना कहने वाला परिवार,

लेकिन मैं इन सबसे हटने वाला नहीं हूँ,
क्योंकि यही rejection
मुझे खुद को सोचने पर मजबूर करता है—
और यक़ीन है,
ये ठोकरें आज भले चुभती हों,
पर एक दिन
मेरी चाल का भरोसा बनेंगी,
और तब
मैं इन्हीं सारे rejection पर
बिना कड़वाहट के
मुस्कुराऊँगा।

- Nilesh Tank

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“एक लड़के की वफ़ा को अक्सर लड़की की बेवफ़ाई से नापा जाता है।”