Quotes by Nilesh Rajput in Bitesapp read free

Nilesh Rajput

Nilesh Rajput Matrubharti Verified

@nileshrajput842gmail.com162713
(2.7m)

मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी नज़र जब आसमान के किसी सितारे पर ठहरे,
तो उनमें से एक नज़र मेरी भी हो।

चाहता हूँ कि जब तुम चलो चार कदम,
तो उनमें से दो कदम मेरे हों।

चाहता हूँ कि जब-जब तुम लो साँस,
तो हर दूसरी साँस मेरी हो।

और जब भी आये खुशी के अनगिनत लम्हे तुम्हारे जीवन में,
तो उनमें से एक लम्हा मेरा हो।

मैं सिर्फ तुम्हे नहीं चाहता, मैं चाहता हूं तुम्हारे हर एक सपने को जो तुम खुली आंखों से देखती हो।

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तेरे बदन पर ढका वो रंग केसरिया!
मेरे दिल को चुराती तेरी ये नजरिया!
बालों में पुष्प और सुर्ख हुए होठ,
छोटी बिंदिया में क्या खूब लगती हो, साँवरिया!

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हम दोनों की आँखों पे पट्टी बंधी है,
न उसे मेरी महोब्बत दिख रही,
न मुझे उनकी बेवफाई दिख रही।

लगी प्यास,
पिया जल,
निकला जहर,
और हम वहीं मर गए।
💔

Thank you Readers and Matrubharti 🙏

અજાણ્યો પત્ર - 33

कितना आसान है कहना कि " मैं सिर्फ खुद से प्यार करती हूं।"

लेकिन जब टूटेंगे सपने खुद की ही गलती की वजह से
क्या तब भी तुम कर पाओगी खुद से प्यार?

जब आईना भी देखकर तुम्हे तुम्हारी गलती दिखाकर मुँह मोड़ लेगा,
क्या तब भी तुम खुद से मिला पाओगी आंखे चार?

जब दिल बैचेन होकर रूह कांप जाएगी तुम्हारी,
क्या तब भी तुम कर पाओगी खुद से प्यार?

जब होगी महोब्बत फिर से किसी अनजान शख्स से,
क्या तब भी तुम सिर्फ खुद से ही कर पाओगी प्यार?

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માત્ર ખુદ ને ચાહવાવાળા વ્યક્તિ સાથે પ્રેમની અપેક્ષા ક્યારેય ન રાખવી.

અજાણ્યો પત્ર - 32

सोच रहा हूं आज झूठ लिख दूं। झूठ लिखूं कि तुम्हारी सुबह की चाय की पहली घूँट मेरे ख़यालों के साथ उतरती है। लिखूं झूठ की जब-जब तुम खुद को सँवारती हो, तो सिर्फ़ मेरी तारीफ़ सुनने की चाह में सँवारती हो। लिखूं झूठ की जब जब दिल भर जाता है तुम्हारा तब तब अपनी बाहों में तुम सिर्फ मुझे पाना चाहती हो और लिखूं एक आखरी झूठ की तुम आज भी सिर्फ मुझसे बेइंतहां महोब्बत कर रही हो।

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અજાણ્યો પત્ર - 31

बारिश होते हुए भी अब मैं नहीं भीगना चाहता। नहीं पसंद अब ये बारिश, जो बादलों को छोड़कर ज़मीन से अपना नाता जोड़ लेते है, बादल जो कई दिनों से अपने पास पानी के हर बूंद को संभालकर रखते है। अपने सफेद रंग को काले रंग में परिवर्तित कर देते है सिर्फ उन पानी की बूंदों को अपने पास रखने के लिये। बारिश की बूंदे जमीं से मिलते देखने से ज्यादा अब मुझे आकर्षित करता है बादलो का पानी के प्रति प्रेम देखकर, कैसे ये बादल खुद को तोड़ते है सिर्फ उन पानी को जमीं से मिलाने के लिए। और यही प्रेम का रूप मुझे अपने प्रेम को समझने के लिए काफी है।

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અજાણ્યો પત્ર - 30

माफी पत्र,
हा तुमने सही पठा। आज मैं माफी पत्र लिख रहा हूँ तुम्हे,
जब मैने देखा कि तुम्हारे चेहरे से हंसी गायब है, जब देखा कि तुम्हारी आंखें जो नम होके रोने को तरस रही है, जब देखा कि तुम खुद से ही कहीं नाराज हो गई हो, जब देखा की तुम अपने सपनों को पूरा करने के लिए तड़प रही हो, तब लगा कि मुझे माफी मांगनी चाहिए, हर वो खत के लिए जिसे पढ़ कर तुम और उदास हुई हो। इसलिए ये खत मेरे माफी का एक जरिया समझ कर माफ कर देना।

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