Quotes by Nilesh Rajput in Bitesapp read free

Nilesh Rajput

Nilesh Rajput Matrubharti Verified

@nileshrajput842gmail.com162713
(2.5m)

અજાણ્યો પત્ર - 31

बारिश होते हुए भी अब मैं नहीं भीगना चाहता। नहीं पसंद अब ये बारिश, जो बादलों को छोड़कर ज़मीन से अपना नाता जोड़ लेते है, बादल जो कई दिनों से अपने पास पानी के हर बूंद को संभालकर रखते है। अपने सफेद रंग को काले रंग में परिवर्तित कर देते है सिर्फ उन पानी की बूंदों को अपने पास रखने के लिये। बारिश की बूंदे जमीं से मिलते देखने से ज्यादा अब मुझे आकर्षित करता है बादलो का पानी के प्रति प्रेम देखकर, कैसे ये बादल खुद को तोड़ते है सिर्फ उन पानी को जमीं से मिलाने के लिए। और यही प्रेम का रूप मुझे अपने प्रेम को समझने के लिए काफी है।

Read More

અજાણ્યો પત્ર - 30

माफी पत्र,
हा तुमने सही पठा। आज मैं माफी पत्र लिख रहा हूँ तुम्हे,
जब मैने देखा कि तुम्हारे चेहरे से हंसी गायब है, जब देखा कि तुम्हारी आंखें जो नम होके रोने को तरस रही है, जब देखा कि तुम खुद से ही कहीं नाराज हो गई हो, जब देखा की तुम अपने सपनों को पूरा करने के लिए तड़प रही हो, तब लगा कि मुझे माफी मांगनी चाहिए, हर वो खत के लिए जिसे पढ़ कर तुम और उदास हुई हो। इसलिए ये खत मेरे माफी का एक जरिया समझ कर माफ कर देना।

Read More

कल तो जी रहा था,
पता नहीं आज क्यूं मर गया।

एक independent woman एक से ज्यादा पुरूषों पर निर्भर होती है।

"अब तो तुम आगे बढ़ गए होगे?"

"हाँ, बढ़ गए हैं उंगलियों के नाखून, बढ़ गई हैं रातों की करवटे, बढ़ गई है हर महीने की तनख़्वाह, बढ़ गई हैं चेहरे की झुर्रियाँ, बढ़ गई है जीवन की जिम्मेदारियां और एक दिन बढ़ जाएँगी यूँ ही मेरी साँसें...तब शायद तुम्हें अपने प्रश्न का सही उत्तर मिल जाएगा। तब मैं कहूँगा हाँ, अब मैं आगे बढ़ गया हूँ।"

Read More

અજાણ્યો પત્ર - 28

बीते कुछ दिनों से मैं तुम्हारी तस्वीरो से दूर रहा हूं, जैसे कोई पंछी अपने पंखों को समेटकर आसमान से दुश्मनी मोड़ ली हो, जैसे कोई मछली बिना पानी के भी कुछ चंद लम्हे जीने लगी हो, वैसे ही मैंने भी तुम्हारी यादों से दुश्मनी मोड़ ली है, वैसे ही मैं अब तुम्हारे बिना भी कुछ चंद लम्हे जीने लगा हूं, पर तुम तो जानती हो ना, मछलियाँ पानी के बिना और पंछी आसमान के बिना सिर्फ तस्वीरों में ज़िंदा रह पाते हैं, और अब मैं भी तुम्हारी तस्वीरों में कहीं समा गया हूँ।

Read More

कोई उसे सिर्फ़ तीन लफ़्ज़ों में ही ले गया,
और हम यूँ ही स्याहियाँ ख़त्म करते रह गए.....💔

સૂરજ ઊગે ને આથમે છે,
ચાંદ સાથે જાણે કોઈ લેવા દેવા નથી....

આકાશ તારાઓથી છલકાઈ ગયું છે આજે,
અમાસ હોય કે પૂનમ જાણે કોઈ લેવા દેવા નથી...

ખરી પડ્યા આજ પણ આંસુઓ નયનથી,
ખુશીઓ સાથે જાણે કોઈ લેવા દેવા નથી...

પૂછ્યું એમણે અમસ્તાં, "લખો છો ક્યાંથી?"
ખુમારી તો જોવો મારી તમે,
લખું છું પ્રેમ પર,
પણ પ્રેમ સાથે મારે કોઈ લેવા દેવા નથી...

Read More

મારો એઠો પડેલો પ્રેમ કોણ લેશે?
આ ઊંડા પડેલા ઘાવ કોણ જરશે?

હાંફી હાંફીને ચાલે છે હવે દરેક શ્વાસ મારો,
આ ઘરડા થયેલા દિલને ટેકો કોણ કરશે?

જ્યાં જ્યાં નજર કરું ત્યાં તારો જ અક્સ દેખાય છે,
આ નબળી પડેલી દ્રષ્ટિને હવે સાજી કોણ કરશે?

Read More

जब जब मोहब्बत की बात हुई,
ज़ुबां से सिर्फ तेरा ही नाम आया,
कमाल तो देखो जनाब-ए-वफ़ा का,
हर एक की ज़ुबां पे सिर्फ उनका ही नाम आया... 💔

Read More