# Precious
सन्नाटे जो चीर रहे हैं
मन के बंधन टूट गए हैं
हृदय के तट पर आ बैठी
कोई एक कीमती शाम
बहुत सुहानी है ये शाम !
जालसाज़ से बने यहाँ क्यों ?
भीतर है उद्विग्नता छाई
बाहर-भीतर के झगड़े में
क्यों बन बैठे यहाँ कसाई ?
बहुत कीमती जीवन है ये
क्या-क्या दिखलाता है राम !
साँसों के पनघट पर बैठी
पनिहारिन एक गाती गीत
श्वाँस श्वाँस को छू जाती क्यों
बिरहन की मतवारी प्रीत
प्राणों में है गूँजे श्याम !!
यही प्रिया की है पहचान !!!
डॉ. प्रणव भारती