प्रिय नारियों,
नारीवाद अत्यंत ख़ूबसूरत शब्द है। और उससे ज़्यादा ख़ूबसूरत है इसका अर्थ, जो कि पुरुषों का हर एक बात पर विरोध करना बिल्कुल भी नहीं है।
क्योंकि केवल नारी होना ही आपको पुरुष से योग्य नहीं करता। नारी और पुरुष दोनों को ही सृष्टि ने पूरक बनाया है, और साथ ही अपूर्ण रखा है। ये दोनों ही एक-दूसरे को पूर्ण करते हैं.. और मेरे अनुसार योग्यता जन्म के आधार पर नहीं बल्कि उसके पश्चात स्वयं के कर्मों के आधार पर होनी चाहिए।
इसलिए नारीवादी सोच से उठा विषय सम्मान से परिपूर्ण होना चाहिए, अभिमान से परिपूर्ण नहीं।
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